मेरे टीचर कहते हैं

January 22, 2010 at 2:07 pm | Posted in humour, india | 6 Comments
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I wrote this poem today. Please rate it and comment on how you feel about the same.

जिस देश में गंगा बहती है
उस  देश  में  नंगे  रहते  हैं
ये  मेरे शब्द  नहीं  हैं
ऐसा  मेरे  टीचर कहते हैं

खम्बे हैं  पर  बत्ती  गुल
महीने  की  इनकम 6 सौ  कुल
दीवाली में  दिल  जलता  है
पर  हंस  कर  ये  सब  सहते  हैं

ये  मेरे शब्द  नहीं  हैं
ऐसा  मेरे  टीचर कहते हैं

अँगरेज़  यहाँ  से  चले  गए
अंग्रेजी  माता  छोड़  गए
इस  देश  की  सुन्दर  भाषा  का
हर  अंग  पटक  कर  तोड़  गए

इस  क्षति  को  देख  के  रोता  हूँ
और  खून  के  आंसू  बहते  हैं

ये  मेरे  शब्द  नहीं  हैं
ऐसा  मेरे  टीचर  कहते  हैं

—— हिमांशु जोशी


6 Comments »

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  1. Kya khoob Boss.

  2. 5* out of 5

  3. very nice

  4. Nice poetry

  5. Hey ,nice recitation…

  6. Nice Poem.
    Bahut sundar kataaksh hai.


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